बोचांग ब्रॉडचेन को जानकारी मिली है कि 14 अप्रैल को, कॉइनडेस्क के मुताबिक, जेपी मॉर्गन के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) जेरेमी बार्नम ने एक वित्तीय परिणामों की टेलीकॉन्फ्रेंस में कहा कि अगर स्टेबलकॉइन पर नियम पारंपरिक बैंक जमाओं जैसे नहीं होंगे, तो वे "नियामक आर्बिट्रेज" का एक जरिया बन सकते हैं।
बार्नम ने कहा कि कुछ स्टेबलकॉइन मॉडल पहले से ही जमा उत्पादों जैसी विशेषताएं दिखा रहे हैं, जैसे कि समान रिटर्न देने वाले प्रोत्साहन। हालांकि, इन पर बैंकों की तरह पूंजी, तरलता और ग्राहक सुरक्षा से जुड़े नियामक बंधन लागू नहीं होते, जिससे एक अनुचित प्रतिस्पर्धात्मक माहौल बन सकता है।
जेरेमी बार्नम ने कहा, "अगर एक जैसे उत्पादों पर एक जैसे नियम नहीं लागू होंगे, तो इससे आर्बिट्रेज के मौके पैदा होंगे।"
फिलहाल अमेरिका में, क्रिप्टो नियामक ढांचे को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसमें 'क्लैरिटी ऐक्ट' भी शामिल है। इसका मकसद स्टेबलकॉइन बाजार के विकास को नियंत्रित करना और SEC व CFTC के बीच नियामक जिम्मेदारियों को साफ करना है।
इसके अलावा, स्टेबलकॉइन उपयोगकर्ताओं को रिजर्व फंड से मिलने वाले लाभांश बांटने की इजाजत देना भी एक विवादास्पद मुद्दा बन ग��ा है। कोइनबेस समेत कई क्रिप्टो कंपनियों ने "ब्याज देने वाले स्टेबलकॉइन" का समर्थन किया है। वहीं, बैंकों का मानना है कि यह कदम स्टेबलकॉइन को जमा उत्पादों के और करीब ले आएगा, लेकिन फिर भी उन पर उचित नियामक बंधन नहीं होंगे।
जेपी मॉर्गन ने नियमन में स्पष्टता का समर्थन किया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि "नियमन में एकरूपता" की गति से ज्यादा अहमियत है। इसके अतिरिक्त, बैंक अपने ब्लॉकचेन विभाग ओनिक्स (Onyx) के जरिए JPM Coin और टोकनाइज्ड डिपॉजिट जैसे उत्पाद विकसित कर रहा है, ताकि भुगतान प्रणाली को आधुनिक बनाया जा सके।
